आइना…

आइना ..

ये आँखें भी इक आइना हैं
बहला दें , बहका दें
बिन पूछे सब बतला दें

कभी छुपाएं
दर्द और अकेलापन
कभी झलका दें
दिल का दीवानापन

इंतज़ार भी इनमें
इकरार भी इनमें
कभी छलावा बन जाएँ
तो कभी चाहत में सिमटें

ख्वाब भी यही
मायूसी भी
उम्मीद में डूब जाएँ
या शर्म से झुक जाएँ

कभी शरीर हो जाएं
कभी नफरत में चूर
हो जाएँ कभी शर्मसार
या फिर मग़रूर

पर जहां में सबसे खूबसूरत हैं
माँ की आँखें
प्यार से भरी
भोलेपन से तर
ये ममता की ऐसी चौखट है
जो कर दे आसान हर सफर

— स्वाति नैथानी

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2016
    • Swati naithani Swati naithani 06/02/2016
  2. डी. के. निवातिया dknivatiya 06/02/2016

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