सबक

भले ही वो प्यार पल भर के लिए ही था,
किसी ने हम से प्यार निभाया तो है l
तह दिल से उस हसीना का,
शुक्रिया अदा करते है हमl
जिस ने यह मंजिर हमें दिखाया तो है ll
भले ही वो प्यार ——–

जब तक न चोट लगती दिल पर,
कैसे पता चलता गम क्या होता है l
जब अपने ही चले जाते है गैर की बाँहों में,
तो कैसे दिल आहें भर कर रोता है l
यह शख्स जो हँसा करता था दुनिया के रंजोगम पर,
किसी ने इस को भी रुलाया तो है ll
भले ही वो प्यार ——–

क्यों किए बादे,
क्यों खाई झूठी कसमें l
गैर की बाँहों में जाने से पहले,
तू निभा तो जाती प्यार के रस्में l
हर औरत बफा नहीं करती,
बे-बफ़ाएं भी होती है औरतें l
यह सबक हमें सिखाया तो है ll
भले ही वो प्यार ——–

ऐ- खुदा ! आबाद बनाये रखना,
उस के हरे भरे संसार को l
जिस ने हमारें साथ न सही,
किसी और के साथ ही सही l
आशयां बनाया तो है ll
भले ही वो प्यार ——–

संजीव कालिया

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/02/2016
  2. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 07/02/2016

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