सावन रातों में तुमबिन ||ग़ज़ल||

सावन रातों में तुमबिन तन्हा गुजारा है |
बसंत आगमन तेरा आने का इशारा है |

तुझे याद कर कभी हँसना कभी रोना ,
तसव्वुर में खो जाना आदत हमारा है |

तूने दी थी निशानी बिछड़ने के पहेले ,
पुरानी खत,तस्वीर जीने का सहारा है |

वो बचपन की बाते याद जरा कर ,
मेरी ज़िंदगी रंगी नदिया, तू किनारा है |

ये जाने वफ़ा लौट आ मेरे शहर ,
दिल ने तुम्हें आज फिर पुकारा है |

कौन कहता है तुम्हें भूल गये है ,
जुबाँ में बस एक नाम तुम्हारा है |

Dushyant kumar patel ***