ऐ-ज़िंदगी”…

बेशक़ आज हम तेरी हाथों के,
कठपुतली बने हैं “ऐ-ज़िंदगी”…
वरना किसी वक़्त तूँ हमारे,
इशारों पे चला करती थी…..!!

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Acct- इंदर भोले नाथ….
Slice-of-Life