कॉलेज का माहौल

कॉलेज का माहौल

कॉलेज का माहौल है ऐसा,नही सोचा था कभी मैंने जैसा
होती है पढ़ाई यहां दिन भर,नही लगता मेरा जी मन
आता मजा जब आते गणित के सर,लगता है खा रहा हलवा भर भर
पढ़ाते जब भौतिक विज्ञान के सर,चला जाता हूँ वैज्ञानिको के घर
प्राकृतिक पर्यावरण को पढ़ाती मैंम,लगता हूँ कर रहा जंगलो की सैर
अंग्रेजी है मेरी थोड़ी नीरस,पर मैंम पढ़ाये तो बढ़ जाये धीरज
मैकेनिक्स में लगता है डर, सर के आते ही बच्चे भागे हड़बड़
इलेक्ट्रॉनिक्स को है मैंम पढ़ाती,करन्ट को सहना हमे सिखाती।
प्रोग्रामिंग्स में है कुछ कमजोर,सर के पढ़ाने पर नींद आये बड़ी जोर !
लंच हुए तो कुछ खाना खाते, कुछ कालापानी तो कुछ चाय मंगवाते
कैंटीन के सामने बैठते है ऐसे,मानो चौकीदारी कर रहे हो जैसे
होती है भीड़ कैंटीन में इतनी,मानो आये हो शादी में किसीकी !
लंच कर कचरा कूड़ेदान में न डाले, अंधमूर्खो की तादाद बढ़ावे
स्वच्छता अभियान को ठेंगा दिखावे,सभ्य विद्यार्थियो की नाक कटावे
अचानक से एक कानफ़ाड़ू आवाज़ आई,बच्चों को ये सन्देश बताई
हो गया लंच अब लेलो लेक्चर या पिछवाड़े से भागो सब छिपकर
कुछ कक्षा तो कुछ पुस्तकालय जाते तो कुछ कैंटीन में शोभा पाते
लंच के बाद पढ़ना बड़ा दुखदाई, मानो कर रहा हो कोई हमारे तंवे से सिकाई
इतना सलेबस और समय कम, पढ़ते पढ़ते निकल जाये दम
उप्पर से ये मौसम की मार, कभी गर्मी तो कभी ठण्ड अपार
पढ़ पढ़कर थक जाये भरपूर,अब न पढ़ाओ ये इच्छा हो जाये कबूल
न होती इच्छा कबूल तो मिलता एक ही विकल्प
बैठ जाये पीछे आज्ञा से और ले ले झपकी 10 या 15 मिनट
अंतिम लेक्चर होते है बड़े ही अद्भुत और निराले, लेते है कुछ उबासिया तो कुछ गिर जाते बेहोश प्यारे
होती हाज़िरी शुरू तो वो बात याद आती, किस कमबख्त ने कहा था कि कॉलेज में बड़े मज़े है आती
वो तो अच्छा है उन बच्चों का जो हँसने का इंजेक्शन लगाते,नही तो हम विद्यार्थी की बजाय रोज मरीज़ ही बन कर रह जाते !
फिर से भोंपू के बजने से सबका चेहरा ख़ुशी से ऐसा खिल गया
मानो पीड़ित मरीजो को उनके इलाज का औषधि मिल गया
छुट्टी होते ही बच्चों ने दे दी कैंटीन में दस्तक
कैंटीन वाले बाबू ने भी ले ली आर्डर झटपट
चौउमिन,पास्ता,समोसा,बिस्किट् खाकर खूब आनंद आया
पर फिर से कचरा कूड़ेदान में न डाल कर असभ्यता का चिन्ह दिखाया
कॉलेज के विद्यार्थी होते है अपने आप में महान
लेकर अधिकांश लेक्चर्स, पेश करते है उदहारण बेमिसाल
ये कॉलेज का माहौल है जो मुझे बड़ा ही भाया
सबके बस की बात नही है पढ़ना, ये मेरी समझ में आया

पढ़ने के लिए धन्यवाद पाठको

2 Comments

  1. omendra.shukla omendra.shukla 05/02/2016
    • सारांश सागर Sagar 05/02/2016

Leave a Reply