“चाँद की गुस्ताख़ी है”ग़ज़ल-डॉ. मोबीन ख़ान

चाँद की गुस्ताख़ी है,
सज़ा भुगतना है आपको!! १

ख़्वाब की फ़र्मैस है,
दिन भर तड़पना है आपको! २

रात भर नींद भी तोड़ो,
ग़ौसे बदलना है आपको!! ३

चाँद की गुस्ताख़ी है,
सज़ा भुगतना है आपको!! १

दूर है मज़िल हमारी,
हिम्मत से चलना है आपको! ४

राह-ए-सफ़र में काँटे हैं मग़र,
बचकर निकलना है आपको!! ५

चाँद की गुस्ताख़ी है,
सज़ा भुगतना है आपको!! १

चाहे आजाये तूफ़ान या ज़लज़ला,
इन सब से टकराना है आपको! ६

अब हमें मंज़िल नज़र आती है मोबीन,
बस हर हालात से लड़ना है आपको!! ७

चाँद की गुस्ताख़ी है,
सज़ा भुगतना है आपको!! १

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/02/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 06/02/2016
  2. omendra.shukla omendra.shukla 04/02/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 06/02/2016

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