बिटिया

वो खेलती बिटिया, वो डोलती बिटिया,
समय के हर तार को वो छेड़ती बिटिया।

कैसे नए-2 वो अक्सर चेहरे बनाती हैं,
बिटिया तो रोते हुए भी, कितना हंसाती है।
आवाज़ से रौनक घर की, बातों से माहौल बनाती है,
घर बेटियां हो जिस घर, वहां लक्ष्मी घर कर जाती है।।

मासूम हाथों से जब वो गुड़िया सजाती है,
आंखों में ढ़ेर से बिटिया जब सपने सजाती है।
हमेशा दुलार मिल जाए, यही आस जगाती है,
सोच में जोड़ना जिसकी, वो ही बिटिया बन जाती है।

बहुत कुछ छोड़ देती है, पिटारा यादों का देकर,
पिताजी खूब रोता है, बिटिया जब दूर होती है।
शहनाई बजनी चाहिए, कहीं जब बिटिया होती है,
बड़े सौभाग्य होते हैं, जिस घर बिटिया होती है।।

दिलों को जीतती बिटिया, पलों में रूठती बिटिया,
समय के हर तार को वो छेड़ती बिटिया।

मेरी प्यारी बिटिया हेतु

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/02/2016
  2. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 03/02/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/02/2016
    • अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 22/03/2016

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