प्रेम गणित

आओ मेरे प्रेम केन्द्र में समा जाओ
हृदय में मेरे प्रेम परिधि बना जाओ
चहुंओर तुम्हारा प्रेम चर्तुभुज बसा है
जैसे परकार में पेन्सिल को कसा है
गाल गुलाबी आंखे वृत्त सी गोल हैं
मदिरा छलकायें तेरे सुंदर कपोल हैं
आओ मेरे दिल के तुम करीब आओ
दूर जाकर न तुम अधिकोण बनाओ
कातिल तेरी समानान्तर निगाहें भी
तेरे मोह के त्रिभुज में फंस जायें हम
तेरी चाल वक्र रेखा सी मार ही डाले
जैसे गोरी माथे से चुनरी सरका ले
मेरे प्यार को तुम रबर से न मिटाओ
सांसों में समा जाओं मेरे पास आओ
आओ हम प्यार का न्यूनकोण बनायें
समबाहु समान एकदूजे के हो जायें।

……… कमल जोशी ……..