* बदल रही दुनिया *

बदल रही दुनिया
तुम भी बदल जाओ भाई ,
नहीं तो होगी
तुम्हारी यहाँ रूश्वाई।

शाकाहार को छोड़ लोग
मांसाहार को धर रहें ,
दूध दही के स्थान पर ,
अल्कोहल गटक रहें।
शकाहार से शांति आती थी ,
मांसाहार से गर्म जोश आ रहा ,
दूध दही से ताकत आता था ,
जिससे लोग फर्ज निभाता था।
अल्कोहल से लोग होश खोते हैं ,
नाता रिश्ता सब धोते हैं।

बदल रही दुनिया
तुम भी बदल जाओ भाई ,
नहीं तो होगी
तुम्हारी यहाँ रूश्वाई।

पहले रिश्तेदारी में लोग
सतकार और प्यार खोजते थे ,
अब लोग शराब और
धन हो अगाध खोजते हैं।
पहले लोग दूसरे का मान करते थे ,
अब लोग अपना मान दूसरों से कराते
मुद्रा के बल पर लोग दूसरों को झुकाते ,
सब कुछ पाना चाहते।

बदल रही दुनिया
तुम भी बदल जाओ भाई ,
नहीं तो होगी
तुम्हारी यहाँ रूश्वाई।

जाती-पाती टूट रहा
ऐ तो अच्छी बात है ,
रिश्ते नाते छूट रहे
ऐ कैसी सौगात है।
धन-दौलत के आगे
आज कुछ भी नहीं महान ,
माता-पिता को भी लोग नहीं देते सम्मान,
झूठी दम्भ भरते और करते अभिमान।

बदल रही दुनिया
तुम भी बदल जाओ भाई ,
नहीं तो होगी
तुम्हारी यहाँ रूश्वाई।

पहले लोग घर का मतभेद
बैठकर आपस में निपटाते थे ,
अब तो झूठा मुकदमा बना
न्यालय में घसीटाते हैं।
बेटा बाप को बईमान बनाए ,
पढ़-लिख कर विद्वान कहलाए ,
कहे आपने आनंद लिया ,
जिसका हूँ मैं परिणाम।
शर्म से सिर झुक रहा ,
नरेन्द्र का मन कर रहा ,
करने को विष पान।

बदल रही दुनिया
तुम भी बदल जाओ भाई ,
नहीं तो होगी
तुम्हारी यहाँ रूश्वाई।