गरूर तो होगा…

हम गुमनाम फरिस्ते हैं,
वो मसहूर-ए-हुस्न है,
ज़ाहिर है “इंदर” उसे,
खुद पे गरूर तो होगा…

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Acct- इंदर भोले नाथ..

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