नफरत…..(रै कबीर)

नफरत हूँ गुरूर तो होगा
मेरा डर जरूर तो होगा
बेवजह उम्मीद लगाते हो
क्यों आई जहन में मैं
कुछ ना कुछ कुसूर तो होगा ।।
( रै कबीर)

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