दोस्त का वार…..(रै कबीर)

आहत हुए हो, दिल दुखा है
पीठ के पीछे वार हुआ है ।
फिर से जा, दिल पे छा
दोस्त को अपने घाव दिखा ।
मत रख दिल में कङवाहट
रोक नफ;रत की आहट ।
तेरा सदगुण दोस्ती
छोङ दुनिया क्या सोचती ।
भला किया है और करे चल
सुकूं मिलेगा आएगा वो पल ।
बुरे समय में यही है ढाल
नेकी कर दरिया में डाल ।
भूल वाकया मत कर सोच
हीन नहीं तूं आंसू पोंछ ।।

2 Comments

  1. Bimla Dhillon 01/02/2016
  2. रै कबीर रै कबीर 03/02/2016

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