||कागज के टुकड़े ||

“कहते है तस्वीरें होती है कागज की
पर ताकत बहुत होती है इनमे
कहीं पत्थर दिल में प्रेम आभास
तो कहीं आँखे होती है नम इनसे ,

वो भूली पुरानी बातें सारी
वो यादों के बीते अधूरे पन्ने सब
एक पल में सजीव नजर आते है
वो अधूरे किस्सों के पहलु सब ,

बोझिल सा दिल जब हो जाता है
लब्जे जब रुंध सी जाती है दिल में
एक कलम बयां करती है दर्द सभी
निकालके के बिखरे जज्बातों को दिल से ,

आँहे सिमट सी जाती है जब
कागज के उन पन्नों पे आके
फिर सन्देश एक नया मिलता है
जीवन को आगे बढ़ते पाके,

लब्जों की अधूरी दांस्ता
गुमनाम हुए वो दर्द जो दिल के
कागज पे सहज ही छप जाते है
अनगिनत शब्दों को चुन चुनके ||”

7 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/01/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/01/2016
  3. omendra.shukla omendra.shukla 30/01/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir 30/01/2016
  5. omendra.shukla omendra.shukla 30/01/2016
  6. laxman 30/01/2016
  7. omendra.shukla omendra.shukla 01/02/2016

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