* प्यार करना माना है नहीं *

प्यार करना माना है नहीं ,
प्यार निभाने तो आना चाहिए।

जिसे कहते हैं लोग अंधा प्यार
वह है एक चढ़ता बुखार ,
समय आते उतड़ जाए
फिर लोग ले मुह बनाए।

प्यार करना माना है नहीं ,
प्यार निभाने तो आना चाहिए।

जिसे समाज की परवाह नहीं
प्रशासन भी जिसके साथ नहीं ,
एक दूजे का जो ले लेते हैं जान
इसका क्या दें हम नाम।

प्यार करना माना है नहीं ,
प्यार निभाने तो आना चाहिए।

जिसकी हो बुनियाद झूठ पर
जिसे भरोसा नहीं है खुद पर ,
इसे प्यार कहें या कहें आकर्षण
जो सह सके न थोड़ा घर्षण।

प्यार करना माना है नहीं ,
प्यार निभाने तो आना चाहिए।

जो पढाई और उन्नति में हो बाधा
जिसकी तन्हाई में भी न हो पाता ,
जिसके लिए दिल में न हो कोई आशा
उसका क्या करें भरोसा।

प्यार करना माना है नहीं ,
प्यार निभाने तो आना चाहिए।

प्यारे प्यार में पागल न होना
प्यार के उपमा हैं राधा कृष्णा ,
प्यार को प्यार रहने दो
इसको न बनाओ तृष्णा।

प्यार करना माना है नहीं ,
प्यार निभाने तो आना चाहिए।

2 Comments

  1. सारांश सागर Sagar 05/02/2016
  2. नरेन्द्र कुमार Narendra kumar 05/02/2016

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