* ऐ कैसी *

ऐ कैसी स्वंतंत्रता
ऐ कैसी समानता

स्वंत्रतता के नाम पर
लोग उच्छल हो रहे
समानता के नाम पर
संस्कार संस्कृति छोड़ रहे

ध्रूमपान निषेध पर
बड़े-बड़े विज्ञापन आए
बाप बैठे बच्चों को समझाए
फिर भी बेटियाँ चौराहे पर कस लगाए

कर रहे प्रबंधन की पढाई
सब बंधन तोड़ रहें
दुनियाँ को किनारा कर
अनावश्यक नाता जोड़ रहे

ऐ कैसी स्वतंत्रता
ऐ कैसी समानता।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/01/2016
  2. नरेन्द्र कुमार Narendra kumar 30/01/2016

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