(विष) की वर्षा

हो गया मेरे देश का जल दुषित। अब इस पावन धरा का हाल क्या होगा |
पहले लूटा अग्रेजो ने गरीब कोअब इस फकीर का क्या होगा॥
खोल दिये गलि मोहल्ले मे कल कारखाने जहर के गर्भ मे पल रहे बच्चे का हाल क्या होगा |
क्या परोसेगी बच्चे को माँ आंचल से उस थाल में क्या होगा ॥
हो गया ,,;,;,;,,,,,,
कट जाएँगे पेङ पौधे सारे विष के बादल ऊमङ -घूमङ कर आएगे बहूत सारे गिरे गा नीर भूमि पर उस का हाल क्या होगा|
पीयेगे पशु पक्षी ओर जीव बहुत सारे पियेगें दुधवो बच्चेउसका
स्वाद क्या होगा॥
हो गया मेरे देश
नही होगी शादी वादी ना कोई पण्डत ना कोई काजी उस पण्डत का हाल क्या होगा |
नहीं बजेगे ठोल ओर तासे ना! कोई शहनाई फिर उस ठोल की थाप का का क्या होगा॥
हो गया मेरे देश
नही रहेंगी मान मर्यादा किसी की नकोई भाभी ना कोई भैया हर चौराहे पर रावण खङा उस भाभी का हाल क्या होग|
हर ले जायेगा कोई विदेशी कोई कन्या को फिर मेरे देश की मर्यादा का क्या होग |
हो गया मेरे देश
नहीं कर रही इस देश की बहन बेटियाँ अपने वस्त्र से बदन की रक्षा क्यो ले रहे हो भगवान हमारी परिक्षा उस भैया का हाल क्या होगा |
कात रहा है गांधी अपने चरखे पर धागा उस धागे का क्या होगा॥
हो गया मेरे देश का

नहीं रहेंगी सतीयां एक पती पर निर्भर उस पती का हाल क्या होगा|
सर्द ऋतु मे आएगी कर्वा चौथ फिर उस चाॅद का क्या होग ॥
हो गया मेरे देश का जल दूषित अब इस पावन धरा का हाल क्या होगा
पहले लूटा अग्रेजो ने गरीब को अब इस फकीर का क्या होग ॥
कवी लक्ष्मणसिंह बागङी 7734809671

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