जब से तुम गए हो… (नज़्म)

जब से तुम गए हो मेरी ज़िन्दगी से,
बदला तो कुछ भी नहीं इस ज़माने में…

फूल भी खिलते हैं
हवा भी चलती है,
दरिया भी बहते हैं
लहर भी उठती है,
शाम भी होती है
सुबह भी होती है,
लोग भी मिलते हैं
सांसे भी चलती है,

मगर न जाने क्यूँ हर एक चीज़ अधूरी सी लगती है…..

— अमिताभ ‘आलेख’

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/01/2016
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 30/03/2016

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