इश्क़ में मेरे उनकी जानिब…

इश्क़ में मेरे उनकी जानिब, कुछ शिद्दत तो है।
किसी तरतीब मुझे जवाब देना उनकी फ़ितरत तो है।।

फ़ासले का इल्म नही है, न दीदार-ए-यार का गम।
सुकून है मेरे ख़्वाबों में उनकी शिरकत तो है।।

मंज़िल मेरी जिस्म नही था, बस उसका एक दिल था।
दिल से मेरे उसके दिल तक एक सड़क तो है।।

अब न कोई वास्ता ‘आलेख’, दुनिया से मेरा कुछ भी।
एक भरम है उसके मेरे बीच में कुछ तो है।।

— अमिताभ ‘आलेख’

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/01/2016
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 30/03/2016

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