अंतिम इच्छा

हे भगवान मेरी म्रत्यू की अभिलाषा मरण हिन्दुस्तान का अच्छा लगता है ।
जहाँ पर हो सारा देश इकट्ठा वहाँ का नजारा देखना अच्छा लगता है ॥

या मेरी मौत हो जाए लाल किले मे उस खुले आँगन मे मूझे देश का सरताज देखना अच्छा लगता है ।
रोज सायं सवेरे तिरंगा निहारू मूझे देश की परेड देखना अच्छा लगता है ॥
हे भगवान ………………

या मूझको सदृगती प्राप्त हो जाए राजघाट पर गांधी जी के साथ बैठकर मूझे महापुरुष मे बैठना अच्छा लगता है।
आये कोई हिंसा वादी इन्सान उसको अहिंसा का पाठ पढ़ाऊ अहिंसा का पाठ पढ़ाना अच्छा लगता है॥
हे भगवान ………………..

या मूझ को वीर गती प्राप्त हो जाए इण्डिया गेट पर शहीदों के साथ बैठकर मूझे शहीदों मे बैठना अच्छा लगता है ।
आये कोई दुश्मन देश देखने उस को आँख दिखाऊ मूझे दुश्मनो को आँख दिखाना अच्छा लगता है॥

हे भगवान ….

या मेरा अंन्त हो जाए सीमा पर उस मुख्य बिन्दू पर मूझे सैनिकों का पहरा देखना अच्छा लगता है।
रात को मे भी भूत बनू मूझे प्रेत बनकर दुश्मनो को डराना अच्छा लगता है ॥

हे भगवान……..

या मेरा कैलाशवाश हो जाए हिमालय पर्वत पर उस ऊँची चोटी शिखर पर मूझे गंगा मे स्नान करना अच्छा लगता है।
दूसरे देश की खबरें बताऊं क्या मची है खलबल अपने देश को बताऊं मेरे देश मे झाकना अच्छा लगता है ॥

हे भगवान ………
या मेरा स्वर्ग वास हो जाए देश के किसी कोने मे मेरे देश मे समाना अच्छा लगता है।
डाल देना मेरी अस्थीया उस पथ के ऊपर जहाँ से आए देश भक्त देश भक्त की चरणों की धूली फांकना अच्छा लगता है॥
हे भगवान ………
लेखक लक्ष्मण सिंह बागङी

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