कहां (हाईकू)

जीवन एक
अनभिज्ञ भंवर
सफर कहां,
हवा अकेली
महक की आस में
बहार कहां,
गुजारिशों में
सुनहले परिन्दे हैं
आकाश कहां,
मन भटका
अनजान राहों में
डगर कहां,
घरौंदा सजा
अपने आंसुओं से
महल कहां,
सड़क ऐसी
चलना भी दुश्वार
एकांत कहां,
लहू रंग की
जरूरत इंसानी
खंजर कहां,
कटी गर्दनें
जुबानों की जंग में
प्रहार कहां।

……. कमल जोशी ……

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