गीत-वन्दे मातरम्- शकुंतला तरार

वन्दे मातरम्
तम को पराजित करने का बिहान वन्दे मातरम्।
चहुं दिसि शोभित कलरव का जय गान वन्दे मातरम्।।

शोषित पीड़ित मानवता थी बेबस और लाचार
कुचल रही थी उनको पैरों वह गोरी सरकार
उनमें साहस भरने का हो………………………….2
उनमें साहस भरने का संधान वन्दे मातरम्।।

बढ़ा ज़ुल्म जब हद से ज्यादा तड़प उठी मां भारती
आजादी के मतवालों ने किया धोष जय भारती
करने को इस माटी का हो…………………………2
करने को इस माटी का कल्यान वन्दे मातरम्।।

प्रेम, प्यार, सद्भावना, सत्कर्म और स्वाभिमान से
प्रगति की हम डगर चलेंगें आन बान और शान से
सारे जहां से अच्छा है हो……………………………..2
सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान वन्दे मातरम्।।

शकुंतला तरार रायपुर (छत्तीसगढ़)

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