दूर

जब तू मुझसे जाने को है दूर,
तो भी ना जाने क्यों मै चाहती हूँ कि,
जब तक हो सके तुझको मैं,
अपने सीने से लगा के रखूँ ।
है पता मेरा नहीं तू,
साथ तेरा किसी और से है;
और तब तुझ पे ना मेरी,
एक भी कुछ भी चलेगी ।
लेकिन तू जब तक है अकेला
इस कदर तुझसे जुड़ी रहूँ,
की तझसे जुदा हो के भी,
तेरा कुछ मुझ में बाकी रह जाए ।

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