प्यार अँधा होता है

माना की इन शब्दों को पिरोया किसी और ने है
पर सच ही तो है प्यार अँधा होता है
इस अंधे पन में भी प्यार जरूरी है
तेरे साथ समय बिताने लिए
नौकरी को ना जाना
तो कभी बीमार होने का किया बहाना
कभी त्यौहार तो कभी रिश्तेदार, रोज नया बहाना
पर तुझे छोड़ कर कभी ना कर पाया काम अपना
महीना ख़त्म, आया तनखा का दिन
काट कटा कर मिली तनखा केवल पौन
अब नौकरी ही ख़राब बता कर बैठा घर मैं
मिला मुझे नया बहाना
सही तो है प्यार ने किया मुझे निकम्मा

– काजल / अर्चना

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