* सपना *

सपना तो सपना है ,
जिसे चाहो वही अपना है।

सपना सच होती है ,
सपना झूठ भी होती है।
सपना के चक्कर में लोग ,
बहुत कुछ खोया बहुत कुछ पाया।
जिस ने इस पर सही प्रयास किया ,
वह इसे सार्थक बनाया।

सपना तो सपना है ,
जिसे चाहो वही अपना है।

सपना न होती कुछ नहीं होता ,
जानवर संग इंसान भी सोता।
सपना के बदौलत इंसान ने ,
सभ्यता बनाई संस्कृति बनाया।
महल बनाई नगर बसाया ,
दुनियाँ को अपने मुठी में समाया।

सपना तो सपना है ,
जिसे चाहो वही अपना है।

सपना न होती परिवर्तन न होता ,
ए दुनियाँ इतनी सुन्दर न होती।
सब कुछ जड़वत होती ,
न कोई कुछ पाता न खोता।
यहाँ किसी का कोई पहचान न होता ,
न कोई किसी का दुश्मन और न मेहमान होता।

सपना तो सपना है ,
जिसे चाहो वही अपना है।

सपना विकास की जननी है ,
सपना विनाश की जननी है।
जिस ने इसे जैसा लिया वैसा किया
किसी ने औसधि बनाई तो ,
किसी ने बम बना लिया।
कोई मानवता विकास के लिए जिए ,
कोई विनाश का बीज बो दिया।

सपना तो सपना है ,
जिसे चाहो वही अपना है।

सपना देखना माना नहीं ,
इसके दूसरे पहलू पर जाना नहीं।
जब तुम देखो सपना ,
हृदय तुला पर पहले तौलना।
लाभ हानि मानवता का विचार कर के
आगे बढ़ना।

सपना तो सपना है ,
जिसे चाहो वही अपना है।