||बदलता भारत ||

“क्यूँ रोष प्रकट करते हो
क्यूँ होते हो तुम अभिमानी
खत्म हुए इस गौरव पे
क्यूँ करते हो खींचातानी ,

अपने ही जिसे लूट गए
वो चोर कहलाते देशभक्त है
खुद की रक्षा में असमर्थ हो जो
उसको कहते है कानून सशक्त है ,

वीरों की जिस क़ुरबानी को
हिंसा के शब्द दिए जाते है
सरहद पे शहीद सिपाही को
जो संयोगो के चादर बांटे जाते है ,

बलात्कारी जहा समाज सेवक होता है
और सन्यासी ढोंगी कहलाता है
नेता वही कहलाता है
जो ईमान बेच यहाँ जीता है ,

धार्मिक बातें जो करते है
वो रूढ़िवादी कहलाते है
जो धर्मो का विच्छेद करे
वो महापुरुष बन जाते है ,

जिस्म प्रदर्शन जो करती है
महिला आदर्श वो बनती है
संस्कृतीयो में लिपटी हो जो
पुरानी विचारो की मानी जाती है,

जो फिल्मो में नंगे दीखते है
वो हीरो यहाँ कहलाते है
सरेआम जो चुम्बन करते है
आधुनिकता की मिशाल वे बन जाते है ||”

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