हैं वो ना-समझ…

हैं वो ना-समझ “भगवन”जो तुझे पैसों से रिझावे हैं,
दुआ करोड़ों की माँगे,चन्द सिक्के चढ़ावे हैं…
जिसे ज़रूरत है रोटी की,उसे पानी न पिलावे हैं,
जो बना है पत्थरों का, उसे मेवा खिलावे हैं…
हैं वो ना-समझ “भगवन”,जो तुझे पैसों से रिझावे हैं,
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Acct- इंदर भोले नाथ…

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3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/01/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/01/2016
  3. Bimla Dhillon 23/01/2016

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