ज़िक्र…

जुदा हुए भी कुछ इस क़दर, तुझसे “ऐ-ज़िंदगी”,
तूँ नहीं, पर तेरा ज़िक्र मेरी हर अल्फ़ाज़ मे है…

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Acct- इंदर भोले नाथ…

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