मुझको   मेरे  नसीब  से  कोई नहीं गिला

ग़ज़ल –
मुझको   मेरे  नसीब  से  कोई नहीं गिला !
जिसके था जो  नसीब में उसको  वही मिला !!

जिसको वो चाहे उसको वो शोहरत आता करे !
उसके   वगैर   हुक्म  न  पत्ता कोई हिला !!

मिलता है वो सभी से खुलूशो अदब के साथ !
क़ाइम है आज भी वही उल्फ़त का सिलसिला !!

तनहा  वगैर  उसके तो  जीना  मुहाल  है !
या  रब  यही दुआ है मेरे  यार  से  मिला !!

दिल तोड़ के वो साथ रक़ीबों  से  जा मिले  !
मेरी   वफ़ा का  उसने  मुझे ये दिया सिला !!

कैसा  ये इत्तफ़ाक़  है  फूलों के दरमियाँ !
मेरा  ही  सिर्फ फूल चमन में नहीं खिला !!

मेरे  नबी  पे ख़त्म  नबूबत  हुई ‘रज़ा ‘!
पैगम्बरी  का   आगे नहीं कोई सिलसिला !!
………………………….. 
Gazal By salim raza rewa 9981728122

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/01/2016
  2. salimraza salimraza 22/01/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/01/2016
  4. salimraza salimraza 22/01/2016

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