* पार्क *

आज लोग पेड़-पौधों को हैं काटते
प्राकृति छटा के नाम पर पार्क हैं बनाते ,

पार्क से लोग प्राकृति सा आनंद हैं चाहते
कृत्रिम पौधा और झाड़ी लगा खूब हैं निहारते ,

प्राकृति के नाम पर स्वच्छंद हैं विचरते
जीव-जंतु की क्रिया खुले में हैं करते ,

कान फाड़ म्यूजिक हैं बजते
शांति के लिए लोग हैं भटकते ,

पता नहीं लोगों को कब ए समझ आएगी
बनावटी साधनों से शांति-शगुन कहाँ आएगी।