“वज़ूद”…. 37

मेरा “वज़ूद” यही के बस इक अल्फ़ाज़ हूँ मैं..!
सेहरे का गुमनाम सा इक राज़ हूँ मैं………..!!
तुँ ना तमन्ना कर मेरे दीदार की ए-ज़िंदगी…!
अब तो बस तन्हाइयों का एहतियाज़ हूँ मैं…!!

Acct- इंदर भोले नाथ…

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