“ऐ-वक़्त”…

“ऐ-वक़्त”

जब ज़िंदगी दिल से
जिया करते थे..!
जब लबों पे बस हसी
लिए फिरते थे…!!
“ऐ-वक़्त” वो चन्द हसीं के
लम्हात हमे लौटा दे..!!!

जब न थी खबर ज़माने की,
बस खुद मे ही खोए रहते थे..!
जब थक के सारा दिन,
रात को मस्त सोए रहते थे…!!
“ऐ-वक़्त” वो सुकून के चन्द
रात हमे लौटा दे…!!!

जहाँ न दर्द-ए-गम की
जगह थी कोई,
जहाँ न ज़ख़्मों का
कोई ठिकाना था..!
जब झगड़ते थे उसी पल,
फिर अगले पल मिल जाना था…!!
“ऐ-वक़्त” झगड़ने का फिर से
वो जज़्बात हमे लौटा दे…!!!

“ऐ-वक़्त” वो “बचपन” हमे लौटा दे..!!!

…..इंदर भोले नाथ…..

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/03/2016

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