दर्द-ए-दिल…

हर हकीम यहाँ घिरा बैठा,
है दर्द की अंबार मे…
और मैं लिए दर्द-ए-दिल निकला,
मरहम की तलाश मे…

Acct- इंदर भोले नाथ…

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One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/01/2016

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