“मेरी क़लम भाग-19″डॉ. मोबीन ख़ान

मुसीबत चाहे जितनी भी आ ज़ाए,
पर ज़मीर का सौदा नहीं किया करते!

जिस ज़मी ने तुम्हें रहने के लिए छत दिया,
उसकी आबरू को कभी नीलाम नहीं किया करते!

फ़क़त बहुत छोटी है ज़िन्दगी,
हर घड़ी मौत-ए ख़बर की बात नहीं किया करते!

कोशिश करो क़ि ख़ुशियों की बहार रहे फ़िज़ा में,
ग़लती से भी फ़िज़ाओं में नफ़रत नहीं फ़ैलाया करते!

मुसीबत चाहे जितनी भी आ ज़ाए,
पर ज़मीर का सौदा नहीं किया करते!

4 Comments

  1. Manjusha Manjusha 20/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 20/01/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 20/01/2016

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