||देश नहीं मिटने दूंगा ||

“लाशे बिछती है तो बिछ जाये
पर शीश नहीं झुकने दूंगा
कश्ती मिटती है तो मिट जाये
पर देश नहीं मिटने दूंगा ,

वादे टूटते है तो टूट जाये
पर इरादे नहीं टूटने दूंगा
लहू बहते है तो बह जाये
पर कदम नहीं रुकने दूंगा ,

सीने छलनी होते है तो हो जाये
पर हार नहीं होने दूंगा
रक्त के हर आखरी कतरे तक
देश नहीं टूटने दूंगा ,

चले प्रलय की आंधी या फिर
मौत गले से खुद लग जाए
कसम है इस मिटटी की मुझको
मै देश नहीं मिटने दूंगा ||”

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/01/2016
  2. omendra.shukla omendra.shukla 20/01/2016

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