इंतज़ार …………… ( ग़ज़ल )

माना की तुझ पर लगा आज कुछ बंदिशों का घेरा है
मगर हमे मालूम की आज भी इंतज़ार तुझको मेरा है !!

तू साथ नहीं तो क्या असर तेरी वफ़ा का इतना है
बस आँखों में चेहरा और लबो पे नाम एक तेरा है !!

मिलेगी एक दिन जरूर, गर होगी मुहब्बत सच्ची तेरी
होगी दुआ कुबूल, सुना है, खुदा रहम दिल बहुतेरा है !!

मत कर अफ़सोस मिलन का वक़्त की मजबूरियों में
इस जन्म तो क्या हर जन्म मुझ पर अधिकार तेरा है !!

कैसे भूल सकता है “धर्म” मोहब्बत की संगदिली को
बेगाना ही सही वो कल भी तेरा था आज भी तेरा है !!
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डी. के. निवातिया……………….

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/01/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/01/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 20/01/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/01/2016

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