“सिगरेट……( Cigarette)

सारी रात मैं सुलगता रहा,
वो मेरे साथ जलता रहा
मैं सुलग-सुलग के
घुटता रहा,वो जल-जल
के, ऐश-ट्रे मे गिरता रहा,
गमों से तड़प के मैं
हर बार सुलगता रहा
न जाने वो किस गम
मे हर बार जलता रहा
मैं अपनी सुलगन को
उसकी धुएँ मे उछालता
रहा, वो हर बार अपनी
जलन को ऐश-ट्रे
मे डालता रहा,
घंटों तलक ये सिलसिला
बस यूँ ही चलता रहा
मैं हर बार सुलगता
वो हर बार जलता रहा
मेरी सुलगन और उसकी
जलन से “ऐश-ट्रे”
भरता रहा….भरता रहा…….!!

Acct- इंदर भोले नाथ …

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