मैं हु न साथ तुम्हारे

तु अब क्यु डरे मेरे बच्चे , मैं हु न साथ तुम्हारे,
चल सम्हल आगे बड़ मेरे बच्चे ,मेरे बाज़ुओं के सहारे।।
डरना अब तु बिलकुल नहीं ,डर की क्या है औक़ात ,
हम दोनों बस साथ मिलके ,दे देंगे उसको ही मात।।

उस पेड़ पे बैठा पंछी को देख, उड़ान भरने कि है ख्याहिस,
पर, पर् जबतक साथ न दे उसके ,कैसे करे वह कौशिश?
हवा उसका हौसला बढ़ाए , उड़ चल तु मेरे साहारे,
पर् छोटा तु तो क्या हुआ , बैठना नहीं अब मनमारे।।
आजा अब तु हाथ मेरे थामे ले चलु उस गगन के उस पार,
मैं तेरा सवारि बन जाता हुँ, हो जा अब तु सवार।।

छोटा सा पंछि को जब डर डरा नहीं पाया , उड़ गया देखो गगन में कैसे,
तु तो मेरा शेर सा साहसी , क़दम से क़दम मिला सिर्फ़ हमसे।।
डरा हुआ तो मृतक समान ,इन्सान वह कभी न कहलाए,
डर को आते देख वह मन ही मन मर जाए।।
हिम्मत किसी ने दिलाया नहीं डर है मन का कीड़ा ,
जो डरा डरा के कहता रहता, देता रहूँगां तुझको पीड़ा ।।
इस कीड़े को जड़ से उखारने को मैं तो हु तेरे पास,
आजीवन तेरे साथ हि रहूँगा मन मे रखना विश्वास ।।

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 19/01/2016
  2. Manjusha Manjusha 19/01/2016
  3. Sampa 19/01/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/01/2016
    • Sampa 19/01/2016
  5. omendra.shukla omendra.shukla 19/01/2016
  6. Sampa 19/01/2016

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