||मालदा की घटना (व्यंग्य )||

“कहा गए वो महापुरुष
जो बात बात पे खासा करते थे
कहा गए अवार्ड वापसी वाले मुर्दे
जो पल पल में चिल्लाया करते थे ,

मालदा पे ना कोई चिल्लाया है
ना महा पुरुष को खासी आयी है
नहीं कोई अवार्ड वापसी हुई है
शायद अवार्ड खत्म होने को आयी है ,

अब असहिष्णुता की ढोंग नहीं नजर आती
ना बीबी किसी की डरती है
मालदा घटना थी शांति सन्देश शायद
ना इससे कोई घबरती है,

वो सेक्युलर हिजड़े क्युँ मौन हुए
जो छाती फाड़ चिल्लाते थे
छोटी-छोटी घटनाओ पे
सहानुभूति की बंशी बजाते थे ,

ना मीडिया कोई अब रोती है
ना गले किसी के रुंधते है
ना आखों में किसी नेतागण के
घड़ियाली आंसू भी आते है ,

बैठ तमाशा देखो तुम सब
दिल को ठंडक मिल जायेगा
दिन वो दूर नहीं अब तो
जब भारत फिर टुकड़ों में बँट जायेगा ||”

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/01/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/01/2016
  3. omendra.shukla omendra.shukla 19/01/2016

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