thoughts of ALOK UPADHYAY

1.जिदंगी मे ये भी हूँनर आजमाना चाहिए.,
जंग अगर अपनो से हो तो हार जाना चाहिए…!

2.ये धारा जो बहती है,
मिलके रहती है…
बहती धारा बनजा तूँ भी मिल के रह…!

3.मंजिल कितनी भी दूर हो,
पाने की कोशिश करो तो सही…
भटकते तो जीवन मे वो है,
जो कोशिश करते ही नही…!!!

4.मंजिल मेरी ना बेअसर है
ना बेखबर है…
मै अकेला था अकेला हूँ
मेरा रास्ता ही मेरा हमसफर हैँ…!!

5.आज मैने सिखा कि…
कभी किसी को धोखा मत देना
क्योकि..,
धोखे मे सिर्फ वो लोग आते है जो आप को अपना समझते है,
आप पर भरोसा करते है…!

6.एक नया सफर नई राह मे है,
और वो नई राह मेरी निगाह मे है…!

7.”दूसरो को समझाना आसान होता है,
समझना मूश्किल!!”

8.”कभी-कभी खूशी मे भी ऑखे रोती हैँ
किसी-किसी हार मे भी जीत होती हैँ ”

9.जीवन ने एक बात तो सिखाई है. .
एक नया दर्द ही,
पुराने दर्द की दवाई है. . .!!

10.आज आलोक एक बात सुन लोँ,
अपने जीवन की एक राह चुन लोँ!
अपनी कामयाबी को हाथ मेँ लेके,
सपने अपने साथ मेँ लेँके!
कुछ ऐसा करकेँ दिखाना,
हर कोई हो जाऐ दिवाना!

ALOK UPADHYAY POET

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