हम तो इंतज़ार करते रहे (२)- शिशिर “मधुकर”

तेरी सदा का हम तो इंतज़ार करते रहे
बिना मिले तुझे दिल से प्यार करते रहे .

शमा जलती रही है और पिघलती रही है
रोशनी तो लौं से इसकी निकलती रही है
कितने शीशों में बैरी ज़माने ने कैद किया
प्रेमी परवाने फिर भी जां निसार करते रहे

तेरी सदा का हम तो इंतज़ार करते रहे
बिना मिले तुझे दिल से प्यार करते रहे .

आसमानों में जब काली घटा छाती है
जवां सीनो में हलचल सी मच जाती है
बैरी झोंकों से बचने के जतन भी किए
गेसूं हंसी गालों पे तब भी बिखरते रहे

तेरी सदा का हम तो इंतज़ार करते रहे
बिना मिले तुझे दिल से प्यार करते रहे .

हर पल जो उसकी भक्ति में तल्लीन हैं
ऐसे लोगों को अक्सर ख़ुदा मिलता है
उस मंजर की इस दिल में तमन्ना लिए
हम अपनी चाहत का नाम सिमरते रहे

तेरी सदा का हम तो इंतज़ार करते रहे
बिना मिले तुझे दिल से प्यार करते रहे .

शिशिर “मधुकर”

6 Comments

  1. salimraza salimraza 19/01/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/01/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/01/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/01/2016
  3. Manjusha Manjusha 19/01/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/01/2016

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