* कहाँ है बांसुरी वाला *

कहाँ है बांसुरी वाला
जिसकी बंसी का तान निराला।

जो गउओं को चराए
माखन चुरा के खाए ,
अपनी नटखट लीला से
सबका मन बहलाए ,
अभी वह कहाँ है
देखने को मेरा मन छटपटाए।

कहाँ है बांसुरी वाला
जिसकी बंसी का तान निराला।

जिसकी लीला है अध्भुत निराली
जिसे पाने के लिए गोपियाँ फिरती मारी-मारी ,
उसका सावला वर्ण सभी के मन को भाए
राधा जिसकी प्रेमिका जो राधे श्याम कहलाए ,
सवा लाख जिसकी रानी सोलह सौ आठ पटरानी
लम्बी-चौड़ी जिसकी प्रेम कहानी
जो है सभी की जुबानी।

कहाँ है बांसुरी वाला
जिसकी बंसी का तान निराला।

जिसने दुष्टों का संघार किया
संतों का उधार किया ,
जो धर्म-कर्म की स्थापना के लिए
ए अपना अवतार लिया।
जिसके शिर मोर मुकुट
चेहरे पर गजब मुस्कान ,
दुःख दर्द दूर हो जाए जिसके
सुन के बंसी का तान।

कहाँ है बांसुरी वाला
जिसकी बंसी का तान निराला।

जो चिर हरण में नारी का लाज बचाई
दूत बन शांति सन्देश फैलाई ,
युद्ध भूमि में गीता का पाठ सुनाई
सभी का वचन प्रतिज्ञा निभवाई।
जिस की कहा माने महामाया ,
जिस की सूरत में सूर्य का तेज
सीरत में चाँद का शीतलता समाया।

कहाँ है बांसुरी वाला
जिसकी बंसी का तान निराला।

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