“खामोशी”

शान्त जलधि
खामोशी की चादर
नीरव रात

मैं और तुम
सागर तट पर
विचार मग्न

ठंडी बयार
हरहराता जल
सैकत कूल

ऊषा किरण
क्षितिज छोर पर
उगता जीवन ।

“मीना भारद्वाज”

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 17/01/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 17/01/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/01/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 30/12/2016

Leave a Reply