जब रात अंधेरी हो बलमा

जब रात अंधेरी हो बलमा,
घनघोर अंधेरा छाया हो,
दिल सहमा-सहमा हो मेरा,
मुझसे मिलने तू आया हो।

दुनिया जगती या सोती हो,
आँखें हसती या रोती हो,
जब-जब तू कदम बड़ाये बस,
दिल में एक आहट होती हो,

कमरे में खिड़की से आकर के,
मुझे धीरे से जगाना तुम,
क्या-क्या तकलीफें हुईं तुम्हें,
एक-एक करके समझाना तुम,
प्यार की बातें,प्यार के किस्से,
अफ़साने बतलाना तुम,
जो सो जाऊं मैं बीच-बीच में,
थपकी देकर उठलाना तुम,

जब आहट हो कुछ आने की,
दवे पाँव घर जाना तुम,
गर बात मेरी ना माने तो फिर,
जूते खाकर जाना तुम,

जो बीते ना वो रात ही क्या,
जो दीखे ना जज़्बात ही क्या,
बिन आँसू के हालात ही क्या,
बिन पानी के बरसात ही क्या,
जो छूटे न वो साथ ही क्या,
जो पुचकारे न मात ही क्या,
बिन गर्व के कोई जात ही क्या,
तुमसे न हो मुलाकात ही क्या,

फिर आना साजन हर राती,
नयी प्यार की बातें ले आना,
नए प्यार के अफ़साने गाकर,
एक प्यार की झपकी दे जाना।
-Ankur

5 Comments

  1. omendra.shukla omendra.shukla 16/01/2016
    • Ankur Sharma 16/01/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/01/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/01/2016
  4. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 19/01/2016

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