कीचड़ (कीचड़ की दस्ता)

कमल खिले कीचड़ में
फिर भी चड़े मंदिर में
लोग कीचड़ से नसफरत करे
प्यार करे कमल से…………………..

कैसा ये इंसाफ़ हैं
कीचड़ कहे कमल से
हम दोनों साथ रहे
फिर भी दिनों के
अलग-अलग है मान…………..

तुमने अच्छा गुण पाया
जो मिली तुम्हे इज्जत
हमने कैसा परोपकार किया
जिसकी मिली ऐसी सजा……………..

तुम्हारी करती हैं सब पूजा
हमारी करती तृस्कार
हमे छोड़कर तुमको
सब करते हैं प्यार……………

मेरी यही अभिलासा
मेरी यही शिक़ायत हैं
और मुझे कुछ नहीं कहना
यही मेरी दस्ता हैं………………

@md. juber husain