||बिन प्रेमी जीवन कैसा ||

“ख्वाब सजाना दिल में उसके
वो हर लम्हा बेमानी लगता है
जीना बिन उस पागल प्रेमी के
हर पल गद्दारी लगता है ,

ना चाहु कैसे उसको मै
बिन उसके जीवन कुछ ना है
ना सोचु कैसे उसको मै
बिन उसके यादे कुछ ना है ,

हर जज्बात फरेबी लगता है
हर वादे तनहा हो जाते है
जीना जीवन अब तो उसके बिन
खाली दर्पण सा हो जाता है ,

हर श्रृंगार अधूरा लगता है
हर रंग बेरंग सा लगता है
हर लम्हा उसके तन्हापन का
कुछ गाली सा अब लगता है ||”

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/01/2016
  2. omendra.shukla omendra.shukla 15/01/2016

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