||बदलता समय और इंसान ||

“जज्बात बदलते देखे थे हमने
इंसान बदलते कभी नहीं
सपने बिखरते देखे थे
पर उम्मीदे मिटती कभी नहीं ,

बदल गया है समय बहुत
बदला है हर शख्स यहाँ
ना कीमत कोई जज्बातों की
ना रिश्तों में अब विश्वास यहाँ,

वक्त नहीं हैं एक पल का भी
समझने को एक दूजे को
बिखरते रिश्ते,टूटते दिल
मजबूर है संग इनके जीने को ,

अर्थशास्त्र विषय अब प्रमुख हुआ है
सफल जीवन के मापदंडों में
सम्मान पत्र वो शख्स हुआ है
जिसने मापा इसको घंटो में ,

हर एहसास वीराने होते अब तो
जीते समय के संग यहाँ
खोते जीवन के भौतिक दर्पण में
बीतते समय के संग यहाँ ||

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 14/01/2016
  2. omendra.shukla omendra.shukla 14/01/2016
  3. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 15/01/2016
  4. omendra.shukla omendra.shukla 15/01/2016

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