याद जो तेरी आई,,,,,,,

याद जो तेरी आई तो मैंने
पल -पल उसका चूम लिया,
गीत लिखे जो तुझ पर मैंने
अक्षर -अक्षर उसका चूम लिया ,
याद जो तेरी आई,,,,,,,

मैं न जानूँ मंदिर -मस्जिद ,
गिरिजा और गुरुद्वारा
न मैं देखूँ चाँद गगन में
न कोई टूटा तारा
जिन राहों पर पहली बार दिखा था
रोशन मुखड़ा तेरा
उन पाकीज़ा राहों का मैंने
पत्थर -पत्थर चूम लिया
याद जो तेरी आई,,,,,,,,

तेरे- मेरे बीच में दूरी
धरा से जितनी नभ् की दूरी ,
जैसे धरती की प्यास बुझाने
झूम -झूम कर बादल बरसे,
अपने मिलन की आस जगाने
तू भी आ जा सावन बनके,
इंतज़ार में नैनों से मेरे जो
आँसू झर -झर बहते है ,
उन निर्मल आँसू की मैंने
बूँद -बूँद को चूम लिया ,
याद जो तेरी आई ,,,,,,,

नहीं श्रृंगार अब मुझको भाये
मुझे न कोई रंग लुभाये
चूड़ी ,बिंदी ,काजल ,झुमके
सब मुझसे हो गए पराये
तेरे विरह की अग्नि में अब
मेरा तन ये जलता जाये
अब तो आ जा मेरे प्रियतम
जीवन का सूरज ढल न जाये
तेरी साँसों में बसकर
धड़कन-धड़कन को मैंने चूम लिया
याद जो तेरी आई तो मैंने
पल -पल उसका चूम लिया,
गीत लिखे जो तुझ पर मैंने
अक्षर -अक्षर उसका चूम लिया ,
याद जो तेरी आई,,,,,,,।

सीमा “अपराजिता “

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/01/2016
  2. सीमा वर्मा सीमा वर्मा 13/01/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/01/2016
  4. सीमा वर्मा सीमा वर्मा 13/01/2016
  5. Abhishek Rajhans 22/01/2016

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