मेरी प्यारी माँ

खुबसुरत है यह धरती कितनी , तु ने हि दिखलाया,
ममता कितनी कोमल होति है , एहसास तुने दिलाया,
सुख का अनुभव कर पायी मैं तेरे आँचल के हि नीचे ,
जाँहा मैं पड़ी रहती थी हमेशा डर कर आँखें मिचे।
तेरे साये तले हि बसा हुआ है मेरे सपनों का जँहा,
परियों जैसी मुझको तु लगती है , मेरि प्यारी माँ।।

कितने दर्द सहकर तुने दिया मुझको जनम,
तेरी सेवा अब करना है मेरा सबसे पहला धरम,
मुझे चोट जब लगे कभि तो तुझको रोते देखा,
तेरे जैसे कोई हो नहीं सकता इन्सान एैसा अनोखा ,
ग़लत राह पर भटक गई कभि तो तुने किया सही ,
कहा तेरा मुझे हमेशा लगा तु कभि ग़लत थी हि नहीं ,
तुझ जैसा सच्चा दोस्त मुझे मिलेगा दुजा काँहा ,
ईश्वर का तु तो रुप लगे है मुझको मेरि माँ।।

तेरी दुआएँ ताक़त बनके सदा रहे मेरे पास ,
मन मे तुझे तब याद किया माँ जब कभी हुआ उदास,
सौ साल तेरा जीवन हो माँ ईश्वर से यही है प्रार्थना ,
हर जनम मे मेरि माँ को तु ,मेरे पास हि सिर्फ़ भिजवाना।
माँ जैसा कोइ और न होगा कहता है सारा जहाँ ,
अवतार देवी का तु लगे है मुझको , मेरि प्यारी माँ ।।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/01/2016
  2. Sampa 12/01/2016

Leave a Reply