“मेरी क़लम भाग-18” डॉ. मोबीन ख़ान

# मोहब्बत महलों से नहीं होती,
होती है खूबसूरत लोगों से।

दीवारों से घर गुलज़ार नहीं होता,
होता है बच्चों की किल्कारियोँ से।।

# इश्क के दीवानें,
ज़मीं फूंक कर पाँव नहीं रखते।।

खाते हैं दोखे मोहब्बत में,
फ़िर भी तूफ़ान से नहीं डरते।।

# मत सोचो हर घड़ी,
फ़ैसला क्या होगा।।

अब ज़ब दिल दे ही दिया है,
ज़ो होगा सो होगा।।।

# इतना भी क्या डरना,
की मोहब्बत भूल जाएं हमसब।।

तनहा सफ़र नहीं कटने वाला है,
ऐसा ना हो कहीँ रास्ता भूल जाएं हमसब।।

# मेरे पास आओ,
हम मोहब्बत सिखाएंगे।।

ज़माने में रुसवाई भी मिलती है,
हक़ीक़त हम बताएंगे।।

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