छिड़ी बहस इक बात पर……. (रै कबीर)

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छिड़ी बहस इक बात पर
धूम मचाई रात भर।।
बीवीजी गुस्से में लाल
देखके हो गया बुरा हाल।।
पहले मैंने बात पकाई
कि घर में किसने आग लगाई।।
बीवीजी के तेवर तीखे
और गुस्से में मुझपे चीखे।।
चुपचाप बैठ सुन मेरी बात
करी चपङ चूँ पङेगी लात।।
किस पर कर देते हो स्वाह
कमाते हो जो तनख्वाह।।
अरे ऐसा कुछ नहीं पगली
थी कुछ देनदारी पिछली।।
मुझको ना ऐसे चराओ
मेरे सामने हिसाब लगाओ।।
किस किस का करूं हिसाब
पता भी है क्या क्या है भाव।।
फरमाईश करती खोलके दिल
और भरने पङते मुझको बिल।।
भरता हूँ तुम सबका पेट
फिसलता पैसा जैसे रेत।।
दूर शहर में नौकरी बजाता
स्कूटर का पेट्रोल फुंक जाता।।
दिन भर करो टूट कर काम
इक पल का भी नहीं आराम।।
ऊपर से वो मेरा बॉस
हर काम का देता मुझको दोष।।
खून पसीने की ये कमाई
बंद कर आँखें तूने लुटाई।।
घर बैठे जो आए पिज्जा
क्यों ना हो पूरी इच्छा।।
अॉनलाईन शॉपिंग हॉम डिलीवरी
इसी काम की रह गयी नौकरी।।
दूध, पानी, बणिया, बिजली
भर भरके मेरी जान है निकली।।
खुद ने लिया ना कपङा लत्ता
झङा इस पेङ का पत्ता-पत्ता।।
टूटे मेरे जूते चप्पल
पर न आई तुमको अक्कल।।
थक गया हूँ अटकती साँसें
सहता तुम्हारी घूरती आँखे।।
समझा क्या कोहलू का बैल
क्या है ये घर या जैल।।
बैठी हो जो सर पे चढके
खुद की गलती मुझपे मढके।।
नाम का ही रह गया प्रितम
मारके ताने ढाती सितम।।
हर बात का तुम्हें हिसाब दूं
हर प्रश्न का जवाब दूं।।
अब कैसे तुमको मैं समझाऊं
मेरी बात का यकीं दिलाऊं।।
क्या समझी हो कुछ मेरी बात
या फिर मारोगी मुझको लात।।
तभी अचानक उठी प्रियतमा
हमको याद आई अम्मा।
बस माफ करो मुझको पिया
बैठो जरा थामो जिया।।
मालूम न था के हो परेशान
सुन के हूँ मैं तो हैरान।।
कितना मैंने तुम्हें सताया
पहले क्यों ना मुझे बताया।।
गलती हमें स्वीकार है
कल से बंद अब कार है।।
रोज रोज न होगी शॉपिंग
न होगी तुम्हारी जेब की चॉपिंग।।
बहुत हुआ जीना हराम
जाके करो थोङा आराम।।
हुआ चमत्कार कैसा अजीब
मानो खुल गए मेरे नसीब।।
बहने लगी जो उलटी गंगा
कुछ ना कुछ जरूर है पंगा।।
चलो बहस का हुआ अंत
बदल के दानव हुआ संत।।
तभी द्वार पर कोई आया
उसने बीवी जी को बुलाया।।
बङा सा डिब्बा हाथ थमाया
देखके सर मेरा चकराया।।
जालिम ने थमाया बिल
पढके जिसे घबराया दिल।।
देखते क्या हो इसको ऐसे
निकालो पर्स चुकाओ पैसे।।
घूरती आँखों से मरी आत्मा
उठाले अब तो हे परमात्मा !!!!

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 10/01/2016
    • रै कबीर रै कबीर 31/01/2016
  2. Tishu Singh Tishu Singh 11/01/2016
    • रै कबीर रै कबीर 31/01/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/01/2016
    • रै कबीर रै कबीर 31/01/2016

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